शनिवार, 26 मई 2007

एक पल का साथ

एक पल का साथ अपना ,

गम अगर लो बाँट अपना ,

तो दिलों का बोझ भी हल्का लगेगा ,

फिर दिलों को ग़ैर भी अपना लगेगा ,

किन्तु अगले पल बिछुड़ना भी पड़ेगा,

याद आयेगी तुम्हारी फिर अकेले में,

रो परेंगी यों ही ऑंखें फिर अकेले में ,

आंसुओं कि कुछ लकीरें बन ही जायेंगी ,

रोकने पर हिल्कियां तो आ ही जाएँगी ,

किन्तु तुम्हारी यादें तो हैं जो हमेशा याद आएँगी ,

अकेले में या कि हज़ारों कि महफिल में ,

तुम्हारी यादें ....... हाँ ..... तुम्हारी यादें ।

यादें .......

उस एक पल की.......




2 टिप्‍पणियां:

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